पापा आपसे में रात को कह रहा था अभी पड़ लो वरना कल सारा समय खोजने में ही निकल जायेगा और हो भी यही रहा है आप रात भर सोते रहे और अब उत्तर नहीं मिल राहें है।
"मेरो आज को परचा तो गयो में तो आज के परचा में फेल हो जाउंगो मेरी तो फोज कि नौकरी तो गयी और ए सब तुम्हरे ना पड्बे के माए हे रहोऊ है "
हाँ कुछ ऐसा ही नज़ारा नज़र आता है हर परीक्षा केंद्र पर......
उत्तर प्रदेश में इस समय बोर्ड के एक्जाम चल रहे है। जहाँ सही मायनो में शिक्षा का बलात्कार हो रहा है परीक्षा के बाद मेरिट में वो बच्चे जगह बनाने वाले है जो असल में अपना नाम भी इंग्लिश में नहीं लिख सकते है। परीक्षा केंद्र के आस-पास ऐसा नजारा होता है जैसे कोई मेला लगा हो जहाँ हर कोई इस कोशिश में लगा है कि उसके भाई , बेटे , बेटी को कागज पर लिखी हुए चन्द लाएने कैसे पहुचाई जाए। यहाँ गौर तलब यह भी है कि शायद उस कागज पर लिखे हुए उत्तरों का पेपर से कोई त्तालुक भी ना हो।
उत्तर प्रदेश में परीक्षा के दौरान यह खूब देखने को मिलता के कि जिसे सुबह परीक्षा देनी है वो तो पूरी रात सोता है और जिसे परीक्षा केंद्र के जंगले पर खड़ा होना है वह पूरी रात इस बात दो याद करता नजर आता है कि पिछले कुछ वर्षो में कौन से प्रसन जायदा आये है। जिससे परीक्षा के वक्त उसे उत्तरों को खोजने में जायदा समय ना लगे ।
इससे ज्यादा कुछ लिखने कि शायद ज़रूरत नजर नहीं आती है...
यहाँ गौरतलब यहं है कि यह सब पुलिश प्रशासन और हर जिले के शिक्षा विभाग की नाक के निचे हो रहा है और उत्तर प्रदेश की सरकार सब कुछ देख कर भी अंधी बनी हुई है और हो भी क्यूँ ना उसे नुमाइनदे जो इसमें सामिल है
आखिर कब तक उत्तर प्रदेश में होता रहेगा शिक्षा का ऐसा ही हाल ????????
अगर आप के पास कोई ज़बाब हो तो मुझे ज़रूर बताइएगा...
Your`s Anuj Sharma
pls feed back on my E-mail id ...
anujprincek@yahoomail.com
anujpndit@rediffmail.com
I M waiting ur responce...
thanks for reading..
Tuesday, March 23, 2010
उत्तर प्रदेश में शिक्षा का होता बलात्कार..
पापा आपसे में रात को कह रहा था अभी पड़ लो वरना कल सारा समय खोजने में ही निकल जायेगा और हो भी यही रहा है आप रात भर सोते रहे और अब उत्तर नहीं मिल राहें है।
"मेरो आज को परचा तो गयो में तो आज के परचा में फेल हो जाउंगो मेरी तो फोज कि नौकरी तो गयी और ए सब तुम्हरे ना पड्बे के माए हे रहोऊ है "
हाँ कुछ ऐसा ही नज़ारा नज़र आता है हर परीक्षा केंद्र पर......
उत्तर प्रदेश में इस समय बोर्ड के एक्जाम चल रहे है। जहाँ सही मायनो में शिक्षा का बलात्कार हो रहा है परीक्षा के बाद मेरिट में वो बच्चे जगह बनाने वाले है जो असल में अपना नाम भी इंग्लिश में नहीं लिख सकते है। परीक्षा केंद्र के आस-पास ऐसा नजारा होता है जैसे कोई मेला लगा हो जहाँ हर कोई इस कोशिश में लगा है कि उसके भाई , बेटे , बेटी को कागज पर लिखी हुए चन्द लाएने कैसे पहुचाई जाए। यहाँ गौर तलब यह भी है कि शायद उस कागज पर लिखे हुए उत्तरों का पेपर से कोई त्तालुक भी ना हो।
उत्तर प्रदेश में परीक्षा के दौरान यह खूब देखने को मिलता के कि जिसे सुबह परीक्षा देनी है वो तो पूरी रात सोता है और जिसे परीक्षा केंद्र के जंगले पर खड़ा होना है वह पूरी रात इस बात दो याद करता नजर आता है कि पिछले कुछ वर्षो में कौन से प्रसन जायदा आये है। जिससे परीक्षा के वक्त उसे उत्तरों को खोजने में जायदा समय ना लगे ।
इससे ज्यादा कुछ लिखने कि शायद ज़रूरत नजर नहीं आती है...
यहाँ गौरतलब यहं है कि यह सब पुलिश प्रशासन और हर जिले के शिक्षा विभाग की नाक के निचे हो रहा है और उत्तर प्रदेश की सरकार सब कुछ देख कर भी अंधी बनी हुई है और हो भी क्यूँ ना उसे नुमाइनदे जो इसमें सामिल है
आखिर कब तक उत्तर प्रदेश में होता रहेगा शिक्षा का ऐसा ही हाल ????????
अगर आप के पास कोई ज़बाब हो तो मुझे ज़रूर बताइएगा...
Your`s Anuj Sharma"Pndit"
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anujpndit@rediffmail.com
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"मेरो आज को परचा तो गयो में तो आज के परचा में फेल हो जाउंगो मेरी तो फोज कि नौकरी तो गयी और ए सब तुम्हरे ना पड्बे के माए हे रहोऊ है "
हाँ कुछ ऐसा ही नज़ारा नज़र आता है हर परीक्षा केंद्र पर......
उत्तर प्रदेश में इस समय बोर्ड के एक्जाम चल रहे है। जहाँ सही मायनो में शिक्षा का बलात्कार हो रहा है परीक्षा के बाद मेरिट में वो बच्चे जगह बनाने वाले है जो असल में अपना नाम भी इंग्लिश में नहीं लिख सकते है। परीक्षा केंद्र के आस-पास ऐसा नजारा होता है जैसे कोई मेला लगा हो जहाँ हर कोई इस कोशिश में लगा है कि उसके भाई , बेटे , बेटी को कागज पर लिखी हुए चन्द लाएने कैसे पहुचाई जाए। यहाँ गौर तलब यह भी है कि शायद उस कागज पर लिखे हुए उत्तरों का पेपर से कोई त्तालुक भी ना हो।
उत्तर प्रदेश में परीक्षा के दौरान यह खूब देखने को मिलता के कि जिसे सुबह परीक्षा देनी है वो तो पूरी रात सोता है और जिसे परीक्षा केंद्र के जंगले पर खड़ा होना है वह पूरी रात इस बात दो याद करता नजर आता है कि पिछले कुछ वर्षो में कौन से प्रसन जायदा आये है। जिससे परीक्षा के वक्त उसे उत्तरों को खोजने में जायदा समय ना लगे ।
इससे ज्यादा कुछ लिखने कि शायद ज़रूरत नजर नहीं आती है...
यहाँ गौरतलब यहं है कि यह सब पुलिश प्रशासन और हर जिले के शिक्षा विभाग की नाक के निचे हो रहा है और उत्तर प्रदेश की सरकार सब कुछ देख कर भी अंधी बनी हुई है और हो भी क्यूँ ना उसे नुमाइनदे जो इसमें सामिल है
आखिर कब तक उत्तर प्रदेश में होता रहेगा शिक्षा का ऐसा ही हाल ????????
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Sunday, March 14, 2010
"Kuch Panktiyan Dunaiya Ke Sabse Kubsurut Mahila Ke Bare Me""

नमस्कार दोस्तों आज बहुत दिनों बाद कुछ किया
दरअसल इसे लिखने में समय लगा और कुछ जीवन के व्यस्तताओं में समय निकल पाना मुस्किल रहा उसके लिए छमा करना
आपका अपना - :- अनुज शर्मा "pndit"
अगर आपको इसमें से कोई पंक्ति आपके मन को छु जाये तो ज़रूर बताना । मुझे आपके अनुभवो का इंतजार रहेगा.....
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कविता के सभी अधिकार सुरछित हैं... अनुज शर्मा "Pndit"
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